डोली की जगह पिता ने उठाई बेटी की अर्थी, चिता में जल गया बेटी के पायलट बनने का सपना

डोली की जगह पिता ने उठाई बेटी की अर्थी, चिता में जल गया बेटी के पायलट बनने का सपना करनाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट में बुधवार को प्लेन क्रैश में ट्रेनी पायलट हिमानी कल्याण की मौत हो गई थी। गुरुवार को अंतिम संस्कार के लिए बेटी का शव जैसे ही कुटेल गांव पहुंचा, लाश देखकर पिता निढाल हो गए। रोते-रोते एक ही शब्द कह रहे थे। मेरा बेटा मुझे छोड़कर चला गया। एयरफोर्स से रिटायर जयवीर ने अपनी सारी जमा पूंजी बेटी को पायलट बनाने में खर्च कर दी। बेटी का सपना था कि वो प्लेन उड़ाए, लेकिन अब अधूरा रह गया। पायलट बनने से महज 1 घंटा पहला बेटी का प्लेन क्रैश हो गया। गुरुवार को हिमानी का अंतिम संस्कार कुटेल गांव में  किया गया। पिता ने नम आंखों से बेटी को आखिरी विदाई दी। ऐसे हुआ था हादसा प्लेन में सीनीयर ट्रेनर रंजन गुप्ता (44) और ट्रेनी पायलट हिमानी कल्याण (23) बैठे हुए थे। एयरक्राफ्ट प्लेन नंबर-डी-42 NIKE से अपनी स्टूडेंट हिमानी कल्याण(23) के साथ महाराष्ट्र के गोंदिया के बिरसी हवाई पट्टी से सुबह 9:05 बजे उड़ान भरी थी। हिमानी भारत सरकार के संस्थान 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट' से ट्रेनिंग ले रही थी। इसे राजीव गांधी नेशनल फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के नाम से जाना जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लावनी और महाराष्ट्र के देवरी के बीच बाणगंगा नदी के किनारे सुबह करीब 10 बजे यह ट्रेनी प्लेन रोप वे में उलझ गया। इससे प्लेन क्रैश हो गया। हिमानी दो साल से ट्रेनिंग ले रही थी और ये ट्रेनिंग की आखिरी उड़ान थी। 1 घंटे बाद वह पायलट बनने वाली थी। कमर्शियल पायलट के लाइसेंस के लिए कम से कम 200 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव होना चाहिए और हिमानी 199 घंटे प्लेन उड़ाने का अनुभव ले चुकी थी, बस एक घंटा बाकी था और वह पायलट बन जाती।