बॉलीवुड के सुपरस्टार, विनोद खन्ना का आज निधन हो गया. वो कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे. हैंडसम और डैशिंग, स्वर्गीय विनोद खन्ना को ग़ज़बपोस्ट की तरफ से श्रद्धांजलि.

हिंदी फिल्मों के मशहूर अभिनेता व गुरदासपुर से सांसद विनोद खन्ना का आज मुंबई में निधन हो गया है। दमदार अभिनय के लिए प्रसिद्ध विनोद खन्ना काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनके फैंस के लिए ये एक दुखद खबर है। कुछ समय पहले सोशल मीडिया में उनकी एक फोटो वायरल हुई थी जिसमें वह काफी कमजोर लग रहे थे और उनको कैंसर होने के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि उनके बेटे अक्षय खन्ना ने बाद में यह स्पष्ट किया था कि उनके पिता की हालत में सुधार हो रहा है। विनोद खन्ना के बारे में सबकुछ विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 पेशावर (पाकिस्तान) में हुआ। उनके पिता का टेक्सटाइल, डाई और केमिकल का बिजनेस था। विनोद खन्ना पांच भाई बहनों में से एक हैं। उनके एक भाई और तीन बहने हैं। विनोद बचपन में बेहद शर्मीले थे, स्कूल के दौरान उन्हें एक टीचर ने जबरदस्ती नाटक में उतार दिया और उन्हें अभिनय की कला पसंद आई। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान विनोद खन्ना ने 'सोलवां साल' और 'मुगल-ए-आज़म' जैसी फिल्में देखीं और इन फिल्मों ने उन पर गहरा असर छोड़ा। विनोद खन्ना के पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्मों में जाए। विनोद की जिद के आगे वे झुके और उन्होंने दो साल का समय विनोद को दिया। विनोद ने इन दो सालों में मेहनत कर फिल्म इंडस्ट्री में जगह बना ली। हैंडसम विनोद को सुनील दत्त ने 'मन का मीत' (1968) में विलेन के रूप में लांच किया। यह फिल्म दत्त ने अपने भाई को बतौर हीरो लांच करने के लिए बनाई थी। वह तो पीछे रह गए, लेकिन विनोद की चल निकली। हीरो के रूप में स्थापित होने के पहले विनोद ने आन मिलो सजना, पूरब और पश्चिम, सच्चा झूठा जैसी फिल्मों में सहायक या खलनायक के रूप में काम किया। गुलजार द्वारा निर्देशित 'मेरे अपने' (1971) से विनोद खन्ना को चर्चा मिली और बतौर नायक वे नजर आने लगे। मल्टीस्टारर फिल्मों से विनोद को कभी परहेज नहीं रहा और वे उस दौर के स्टार्स अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, सुनील दत्त आदि के साथ फिल्में करते रहे। अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना की जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया। हेराफेरी, खून पसीना, अमर अकबर एंथोनी, मुकद्दर का सिकंदर ब्लॉकबस्टर साबित हुईं। सफलता के शिखर पर रहते हुए 1982 में विनोद खन्ना ने अचानक ऐसा फैसला लिया कि फिल्म इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया। विनोद अपने आध्यात्मिक गुरु रजनीश (ओशो) की शरण में चले गए और ग्लैमर की दुनिया को उन्होंने बाय-बाय कह दिया। ओशा के आश्रम में इस सुपरस्टार ने बर्तन धोने और माली का काम किया। विनोद के अचानक इस तरह से चले जाने के कारण उनकी पत्नी गीतांजली नाराज हुई और दोनों के बीच तलाक हो गया। विनोद और गीतांजली के दो बेटे अक्षय और राहुल खन्ना हैं। 1990 में विनोद ने कविता से शादी की। कविता और विनोद का एक बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा है। फिल्मों के प्रति प्यार विनोद को फिर फिल्मों में खींच लाया और 1987 में उन्होंने 'इंसाफ' फिल्म से वापसी की। चार-पांच साल तक नायक बनने के बाद विनोद धीरे-धीरे चरित्र भूमिकाओं की ओर मुड़ गए। विनोद खन्ना सलमान खान के साथ बहुत सी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। सलमान उन्हें अपने लिए लकी मानते हैं। एक इंटरव्यू के दौरान, विनोद खन्ना ने कहा था कि उनके समय भी हीरो फिट होते थे परंतु तब बॉडी दिखाने का ट्रेंड नहीं था। विनोद खन्ना फिल्मों में स्टाइलिश अभिनेता के तौर पर सामने आते थे। विनोद खन्ना अभिनेता होने के अलावा, निर्माता और सक्रिय राजनेता भी हैं। वे भाजपा के सदस्य हैं और कई चुनाव जीत चुके हैं। मंत्री भी रह चुके है। 1999 में विनोद खन्ना को उनके इंडस्ट्री में योगदान के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।