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  • परिषद्

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    छत्रपति शिवाजी महाराज के हाथ से लिखे दस्तावेज तो कहीं, किसी संग्रालय या अन्य स्थान पर सुरक्षित नहीं है लेकिन इतिहासकारों के अनुसार जो भी महाराज ने कार्य किये हैं या जो उनकी शासन शैली थी, उसके अनुसार महाराज की निम्न नीतियाँ सामने आती है| जो राष्ट्र को शक्तिशाली एवं अपराध मुक्त बनाने के लिए सुनिश्चित है और परिषद् भी इन्ही नीतियों पर चलते हुए समाज में सुधार व सेवा के लिए वचनबद्ध है:-

    1.”स्वतंत्रता एक वरदान हैजिसे पाने का अधिकारी हर कोई है।”

    2.”एक छोटा कदम छोटे लक्ष्य परबाद मे विशाल लक्ष्य भी हासिल करा देता है।”

    3.”जरुरी नही कि विपत्ति का सामनादुश्मन के सम्मुख से ही करने मेवीरता हो। वीरता तो विजय मे है।”

    4.”जब हौसले बुलन्द होतो पहाङ भी एक मिट्टी का ढेर लगता है।”

    5.”शत्रु को कमजोर न समझोतो अत्यधिक बलिष्ठ समझ कर डरना भी नही चाहिए।”

    6. “जब लक्ष्य जीत की होतो हासिल करने के लिए कितना भी परिश्रमकोई भी मूल्य क्यो न हो उसे चुकाना ही पङता है।”

    7.”सर्वप्रथम राष्ट्रफिर गुरुफिर माता-पिताफिर परमेश्वर।अतः पहले खुद को नही राष्ट्र को देखना चाहिए।”

    8.”अगर मनुष्य के पास आत्मबल हैतो वो समस्त संसार पर अपने हौसले से विजय पताका लहरा सकता है।”

    9.”इस जीवन मे सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिएक्योकी दिन और रात की तरह अच्छे दिनो को भी बदलना पङता है।”

    10.”अंगूर को जब तक न पेरो वो मीठी मदिरा नही बनतीवैसे ही मनुष्य जब तक कष्ट मे पिसता नहीतब तक उसके अन्दर की सर्वौत्तम प्रतिभा बाहर नही आती।”

    11.”जो मनुष्य समय के कुच्रक मे भी पूरी शिद्दत सेअपने कार्यो मे लगा रहता है। उसके लिए समय खुद बदल जाता है।”

    12.”प्रतिशोध मनुष्य को जलाती रहती हैसंयम ही प्रतिशोध को काबू करने का उपाय होता है।”

    13.”कोई भी कार्य करने से पहले उसका परिणाम सोच लेना हितकर होता हैक्योकी हमारी आने वाली पीढी उसी का अनुसरण करती है।”

    14.”अपने आत्मबल को जगाने वालाखुद को पहचानने वालाऔर मानव जाति के कल्याण की सोच रखने वालापूरे विश्व पर राज्य कर सकता है।”

    15.”शत्रु चाहे कितना ही बलवान क्यो न होउसे अपने इरादों और उत्साह मात्र से भी परास्त किया जा सकता है।”

    16.”उत्साह मनुष्य की ताकतसंयम और अडिकता होती है। सब का कल्याण मनुष्य का लक्ष्य होना चाहिए। तो कीर्ति उसका फल होगा।”

    17.”एक सफल मनुष्य अपने कर्तव्य की पराकाष्ठा के लिएसमुचित मानव जाति की  चुनौती स्वीकार कर लेता है।”

    18.”आत्मबलसामर्थ्य देता हैऔर सामर्थ्यविद्या प्रदान करती है। विद्यास्थिरता प्रदान करती हैऔर स्थिरताविजय की तरफ ले जाती है।”

    19.”एक पुरुषार्थी भीएक तेजस्वी विद्वान के सामने झुकता है। क्योकी पुरुर्षाथ भी विद्या से ही आती है।”

    20.”जो धर्मसत्यक्षेष्ठता और परमेश्वर के सामने झुकता है। उसका आदर समस्त संसार करता है।”

    छत्रपति शिवाजी विद्यार्थी परिषद् एक नजर में :

    >  छत्रपति शिवाजी के पथप्रदर्शन में हौंसला, जज्बा, विचार, क्रांति के साथ सभ्य समाज के निर्माण की दिशा में छत्रपति शिवाजी विद्यार्थी परिषद् के बढ़ते कदम|

    >  कुरीतियों को रोकने व समाज उत्थान के कार्य करने वालों का सम्मान करते हुए सबको साथ लेकर चलना हमारा एक मात्र उदेश्य|