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  • छत्रपति शिवाजी महाराज

    सैंकड़ो वर्षों से भारत यवनों की गुलामी सह रहा था| यवनों के अत्याचार चुप-चाप सहने के सिवाए भारतीय जनता को कोई चारा नहीं था| भारतीय वीर भोग विलास में मशगुल होकर यवनों की सेवा करने लगे- संकुचित स्वार्थ ही प्रत्येक का लक्ष्य था| महमूद गजनी से प्रारम्भ होकर आगे लगभग 700 साल यवनों की गुलामी की जंजीरों में भारत देश जकड़ा रहा| परिणाम स्वरूप भारतीय संस्कृति नष्ट होने लगी| संपत्ति हो या आबरू कुछ भी सुरक्षित नही था| भारत की बहन-बेटियों की खुले में इज्जत तार तार होने लगी और उनको जबरन उठाकर अफगान ले जाने का व उनका शारीरिक शोषण के साथ भारी संख्या में धर्म परिवर्तन का सिलसिला चलने लगा| जो नहीं मानता था उसे काट दिया जाता था| चोरी, लूट इत्यादि की घटनाएं तो आम होने लगी थी| लगभग 700 वर्ष बाद एक महापुरुष शिवाजी 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग पुणे (महाराष्ट्र) में राजमाता जीजाबाई की कोख से उत्त्पन्न हुआ|
    1. राजा शिवाजी ने मुग़ल सरदार को पत्र में सूचित किया था कि मातृभूमि की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है| मातृभूमि पर आक्रमण करने वाला कोई भी, कभी भी यशस्वी नहीं कहलाता|
    2. छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक जून 6, 1674 में राजधानी रायगढ़ में हुआ|
    3. पवार, मोरे, चव्हान, शिंदे, जाधव, काशिद, गुजर, देशपांडे जैसे अनेक वीरों ने महाराज शिवाजी की हिन्दवी स्वराज की स्थापना के लिए सहायता की| अनेकों वीरों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, जिनके अनुजों को आज तक अपने पूर्वजों पर अभिमान है|
    4. दीन, दलित, नारी का संरक्षण किया| परस्त्री को माता समान माना| इतना ही नहीं महाराज शिवाजी राष्ट्रपुरुष के साथ युग पुरुष भी थे|
    5. छत्रपति शिवाजी किसी धर्म या जाति के विरोध में नहीं थे, अपितु वे अन्याय व अत्याचार के खिलाफ थे|
    6. वैसे तो अंग्रेज शिवाजी से पहले भारत में आये थे, परन्तु महाराज शिवाजी के रहते तत्कालीन महाराष्ट्र में दखलंदाजी करने का उनका साहस कभी न हुआ|
    7. छत्रपति शिवाजी ने अपने उम्र के 12वें वर्ष से राष्ट्रहित और जनहित कार्य आरम्भ किया, परिश्रमी मवालों एवं सभी पिछड़ी आदिवासी जातियों को एकत्रित कर, उन्हें यथायोग्य एवं क्षमतायोग्य स्थान दिया| हिन्दू ही नहीं अपितु उनकी सेना में मुस्लिम भी मुख्य पदों पर तैनात रहते हुए मुगलों से युद्ध करते रहे|
    8. 1659 में प्रथम भारतीय जल सेना का निर्माण करने का सौभाग्य भी छत्रपति शिवाजी महाराज को ही जाता है| इसलिए इन्हें भारतीय जल सेना का पिता भी कहा गया है|
    9. महाराज शिवाजी के पुत्र संभाजी महाराज ने अपने जीवन में 120 युद्ध लड़े और इतिहास गवाह है कि वे कभी युद्ध में परास्त नहीं हुए|
    प्रत्येक वर्ष फरवरी माह की 19 तारिख को देश में शिवाजी जयंती मनाई जाती है| इस दिन स्कूल में पढने वाले छात्रों को छत्रपति शिवाजी महाराज की बहादुरी एवं वीरता के किस्से सुनाए जाते हैं| इस दिन स्कूलों में कुछ वीरतापूर्ण करतब भी दिखाए जाते हैं ताकि उन्हें देख अन्य लोग प्रेरित हो सकें| एवं छात्रों से महाराज शिवाजी एक वीर, शक्तिशाली योद्धा के रूप में विषय से संबंधित लेख लिखवाए जाते हैं|
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